बिहार: किशनगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) गौतम कुमार के ठिकानों पर हुई छापेमारी में अरबों रुपए की संपत्ति का खुलासा हुआ है। मंगलवार की सुबह एसडीपीओ के आधा दर्जन ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने छापेमारी की, जिसमें नामी बेनामी अरबों की संपत्तियों का खुलासा हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सिलीगुड़ी में चाय बागान, नोएडा-गुड़गांव में फ्लैट और 25 से ज्यादा जमीन के प्लॉट मिले हैं। यही नहीं एक महिला मित्र और पत्नी के नाम पर भी गहने, कार और जमीन के दस्तावेज मिले हैं। मालूम हो कि 1 करोड़ 94 लाख से अधिक आय की संपत्ति मिलने के बाद विभाग ने पटना में मामला दर्ज किया गया था जिसके बाद न्यायालय से प्राप्त आदेश के बाद छापेमारी की गई थी।
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छापेमारी में कहां क्या मिला
- मिली जानकारी के मुताबिक, गौतम कुमार ने कई संपत्तियां अपने नाम के अलावा अन्य लोगों के नाम पर भी ले रखी थीं। जांच में करीब 25 जमीन के प्लॉट का पता चला है, इनमें कुछ जमीन उनकी पत्नी पूनम देवी और उनकी महिला मित्र शगुफ्ता शमीम के नाम पर भी बताई जा रही है। शगुफ्ता शमीम के घर से ही सात जमीन से जुड़े दस्तावेज मिले हैं, जिनकी कीमत करीब 60 लाख रुपये बताई जा रही है।
- पूर्णिया में उनका करीब 3600 वर्गफीट में बना चार मंजिला मकान भी आया है। इसकी कीमत लगभग 2.5 करोड़ रुपये आंकी गई है। छापेमारी के दौरान उनके पास से कई महंगी घड़ियां, क्रेटा और थार जैसी लग्जरी गाड़ियां भी मिली हैं। साथ ही पटना में नर्सिंग होम खोलने से जुड़े कागजात भी बरामद हुए हैं।
- उन्होंने सिलीगुड़ी में चाय बागान में निवेश किया है और नोएडा और गुड़गांव में भी संपत्ति खरीदी है। इसके अलावा बीमा में निवेश और कई अन्य आर्थिक दस्तावेज भी मिले हैं।
- किशनगंज स्थित उनके सरकारी आवास से एक लाख 37 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं। किशनगंज में लगभग 8 घंटे तक छापेमारी चली और इस कारवाई में एसडीपीओ के फोन को भी जब्त कर लिया गया, जिससे बड़ा खुलसा होने की संभावना जताई जा रही है।
- इस कारवाई के बाद किशनगंज जिले के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। कई अधिकारी एसडीपीओ के आवास के बाहर से दिन भर गुजरते और कारवाई की टोह लेते दिखे।
किशनगंज से है एसडीपीओ गौतम कुमार का पुराना रिश्ता
किशनगंज के एसडीपीओ वन गौतम कुमार पुलिस विभाग में 1994 बैच के दारोगा के रूप में पदस्थापित हुए थे। वर्ष 1996 में उनकी पहली पोस्टिंग बतौर दारोगा किशनगंज में ही हुई थी। उस बतौर प्रशिक्षु दारोगा पदस्थापित हुए थे। प्रोवेशन की अवधि भी किशनगंज जिले में ही पूरी हुई थी। यहां के बाद दूसरे जिले में स्थानांतरण हुआ था। वर्ष 2012 - 13 में किशनगंज जिले में ही बतौर मोबाइल दारोगा पदस्थापित हुए थे।इसके बाद पदोन्नति पाकर इंस्पेक्टर और बाद में डीएसपी बने थे। वर्ष 2023 में बतौर एसडीपीओ जिले में पदस्थापित हुए थे। अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने अधिकतर समय सीमांचल के चार जिलों किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार में बिताया।
(किशनगंज से राजेश दुबे की रिपोर्ट)